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शिरोधार्य करता हूँ आशीष आप सबका

SANGRAM SINGH

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गीत,मीत, रीति और प्रेम का पुजारी हूँ
        
                                                    
                            
स्वार्थ,अर्थ,हेतु मैं कहीं विनाशकारी हूँ
है जो निष्कपट तथा अतीव जो दुखारे है
हूँ मैं उनका प्रिय और वो मेरे लिए प्यारे है
सिद्ध जो हुआ अशुद्ध ,बुद्धि और विवेक से
हूँ सदा मैं दूर ऐसे व्यक्ति से हरेक से
मन मे जिनके द्वेष हो हॄदय में ही घमंड हो
लोभ हो अथाह दुःचरित ही प्रचण्ड हो
वो मेरे हृदय में जुगुप्सा मात्र पाएंगे
अधर्म की इस आंधी से विध्वंस वो हो जाएंगे
ज्ञानवान शीलवान दयावान आदि का
शिरोधार्य करता हूँ आशीष आप सबका
एक महीने पहले
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