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मतलबी

Sandhya Kumari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लोग तुम्हें मतलबी कहते रहेंगे, तुम नजरअंदाज कर देना।
        
                                                    
                            
यूं ही नाराज होने वालों को थोड़ा और नाराज कर देना।
आखिर कौन होते हैं वो लोग?आखिर कौन होते हैं वो हमें मतलबी कहने वाले?
खुद मतलब की ही महफिल में सुबह-ओ-शाम रहने वाले।
अब हमें फर्क नहीं पड़ता उनसे,जो मतलब की चौखट पर दिन-रात गुजारते हैं।
हमारी खामोशी को हमारी बेरुखी मत समझना,हम बस वहां नहीं झुकते जहां लोग रिश्ते बिगाड़ते हैं।
महफिल की झूठी वाह-वाह से अब तौबा ही भली है,अपनी खामोशी को ही तुम अपना हमराज कर देना।
लोग तुम्हें मतलबी कहते रहेंगे, तुम नजरअंदाज कर देना।
3 महीने पहले
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Manju Sharma

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