विज्ञापन

विश्व स्काउट स्कार्फ दिवस कविता

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गले में लिपटा कपड़ा तिकोना,नहीं कोई साधारण धागा,
        
                                                    
                            
जिसने भी धारण किया इसे,भाव उसमें सेवा का जागा
यह स्कार्फ हमको सिखाता है,क्या मानवता की राह है
स्काउट इसको समझता है,समाज की उससे क्या चाह है

गिरते हुए को थाम लेता है,लाभ हानि की नहीं उसको चिंता
लोगों को उससे खुशियां मिलें गम नहीं उसको क्या है छिनता
भटके को सही रास्ता बताना,जो हो संकट में उसको बचाना
है ये स्कार्फ नहीं मात्र कपड़ा,जरूरतों में है इसे काम आना

टूटी हड्डी का बनता सहारा,घाव पर पट्टी बनकर बचाता
चिलचिलाती हुई धूप में भी,बनकर छाया ये हमें बचाता
छात्र हो या कोई नागरिक हो,राह अनुशासन की दिखाता ये
आए मेहनत से जब पसीना,उसे पोंछ हमें आगे बढ़ाता ये

निस्वार्थ भाव से सेवा को,स्काउट अपना धर्म बनाता है
नहीं कभी कोई भेदभाव,कुँवर सबको गले लगाता है
पहला अगस्त स्कार्फ दिवस,यह गौरव है, यह आन है
रंग भर देता यह जन-जन में,यह स्काउटिंग की शान है
-कुँवर संदीप सिंह
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all