मत सर मारो उस पत्थर में
जिसको नहीं जरा सा भान
अच्छे बुरे की समझ नहीं है
न ही जानता क्या है मान
उसे सिर्फ अपना दिखता है
अपना लाभ बस अपना काम
नहीं विवेक नहीं मर्यादा है
करें तुच्छता गिरे धड़ाम
किया नहीं जीवन में उसने
औरों के हित कोई काम
लूट सके हिस्सा अपनों का
नजर इसी पर आठों याम
-कुँवर संदीप सिंह