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मात देते थे कल तक

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मात देते थे कल तक हवाओं को जो
        
                                                    
                            
आज पल उनका कैसे बदल सा गया
अपने आगे नहीं गिनते थे जो कभी
सूरज उनका है आज कैसे ढल सा गया
-कुँवर संदीप सिंह
3 महीने पहले
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