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क्यों न जाती है

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज भी उड़ रहे हैं उड़ते भाव उनके
        
                                                    
                            
उड़ान ये कोई ठहराव क्यों न पाती है

सोचता था तब जो आज भी वही सोचूँ
दिलो दिमाग से गुबार क्यों न जाती है
3 घंटे पहले
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