किसे कहते हैं नशा
बता सकता हूं मैं
शब्दों में ही सही
जता सकता हूं मैं
जब चढ़ता है यह
सब उतर जाता है
जिंदा रहती है मौजें
ग़म तो मर जाता है
यहीं तो बात है इसमें
जो सबको दबा देती है
जहां कुछ भी नहीं होता
यह महफिल सजा देती है
-कुँवर संदीप सिंह