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कहां पढ़ाने बैठा हूँ

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खुद का विपथन कर चुके हैं
        
                                                    
                            
वे हमको चलना सिखाते हैं
खुद व्यस्त हैं लूटने में माया
और छाया हमारी बनाते है
हम तो फिर भी समर्पित हैं
पर वे कहते हैं कि ऐंठा हूं
मैं कहाँ पढ़ाने बैठा हूँ
-कुँवर संदीप सिंह
3 महीने पहले
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