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आभा मर्यादा में

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आभा मर्यादा में बसती
        
                                                    
                            
मुस्कान ही नहीं है सब कुछ
मत समझो अपना भाव बहुत
यदि कोई नहीं कहता है कुछ

खामोशी में भी शोर बहुत
सुनने वाला सुन लेता है
जिसको दरकिनार किया जाए
खुद ही खुद को गिन लेता है
-कुँवर
एक दिन पहले
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Jagdish chandra

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