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मेरा सन्देश मेरे प्रियतम तक पंहुचा देना

Sandeep Saini

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये हवा तेरा भी क्या नसीब है,
        
                                                    
                            
सारे बन्धनों से दूर तू बड़ी खुशनसीब है |
तुझे न किसी अवरोध की फिकर है,
न ही समाज के उसूलों का डर हैं |
तू बेपरवाह कहीं भी चली जाती है,
जहाँ तुझे जाना हो तू वहां से गुजर जाती हैं |
मेरी गुजारिश है तुझसे मेरा एक काम कर देना,
मेरा सन्देश मेरे प्रियतम तक पंहुचा देना |
उनसे कहना कि मैं दिन रात उनको याद करती हूँ,
उनकी विरह में हर पल तड़पती रहती हूँ |
बेपनाह प्यार मैं उनको करती हूँ,
आज भी घर की चोखट पर खड़ी इंतजार करती हूँ |
वर्षों बीत गए उनका कोई सन्देश नहीं आया,
हमें प्यार है उनसे इतना कि अब तक न भुला पाया |
यहाँ दुनिया वाले न जाने क्या क्या बात करते हैं,
पर मुझे मालूम है शहीद मरते नहीं जिन्दा रहते हैं |
ये हवा मेरी गुजारिश है तुझसे,
मेरा ये सन्देश उनके पास पहुंचा देना,
जब तू लौटकर आना तो उनका सन्देश और प्यार भी लेते आना |
ये हवा तेरे लौटने का बेसब्री से इंतजार करूगीं,
तेरे साथ आने वाले उनके प्यार के एहसास के लिए मैं इंतजार करूंगी |
मेरी गुजारिश है तुझसे मेरा एक काम कर देना,
मेरे प्रियतम का सन्देश मुझ तक पंहुचा देना.... 

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