पहली बार
जब मैं मिला तुमसे,
मिलकर ये अहसास हुआ,
कुछ लोग ज़िंदगी में
ज़िंदगी बदलने नहीं आते,
ज़िंदगी का मतलब ही बदल देते हैं।
इतनी मोहब्बत
जो तुमने हमसे की,
तुम्हारा हाथ थामकर चलने को,
मेरे दिल ने मंज़ूर किया।
पता था मोहब्बत है
तो मंज़िल का सफर
मुश्किल ही है, आसान नहीं होगा
तुम मेरी हिम्मत बने,
मुझे दिल से सहेजा।
जब-जब मुझे
अपनों की बातों से
टूटन सा महसूस हुआ,
ताने-बाने की रस्साकशी से
सांसों में घुटन सा महसूस हुआ।
तो तुम मिले
एक सहारा बनकर,
मेरे तूफानों की कश्ती में
नदी का एक छोर-किनारा बनकर।
जैसा सोचा सब हुआ,
और फिर आया वो ख़्वाब
एक हकीकत का रूप लेकर,
एक ऐसा सफर अपना
जिसमें मैंने बना लिया तुम्हें
अपनी ज़िंदगी का हमसफर अपना।
अब शुरू हुई ज़िंदगी
और चल पड़ा ज़िंदगी का सफर,
वो बातें, वो यादें,
वो साथ जीने के वादे
अब मुकम्मल हो चली हैं।
एक सपना जो अपना था,
उसे हकीकत करके
ज़िंदगी बदली या नहीं,
ये तो मुझे नहीं मालूम,
हां इतना पता है।
तुम्हें जितना जतन से पाया है,
बस ख्याल ही नहीं रखूंगा,
तुम अनमोल रतन हो मेरे लिए,
मैं तुम्हें अपने पलकों में
खुद से ज़्यादा संभाल कर रखूंगा।।