गुलों से बैर रखना खारों से कम दोस्ती रखना।।
कोई कैसा भी हो लेकिन तबस्सुम कागज़ी रखना।
सफ़र में कौन जाने है के कौन अपना मिल जाए,,
नज़र से साफ़ रहना और पुर-नम आशिक़ी करना।
सफ़ाई देनी है तो दो मगर इतना सा ख़्याल रहे,,
कोई अपना अगर हो रूबरू कम ज़्यादती करना।
संभालना आ भी जाएगा जरा सी आँख खोलो तो,
अभी आफ़ताब चमकेगा नम संजीदगी रखना।।
किसी को देखकर आफ़ाक़ सा मत चमक जाना,,
अगर वो मिल भी जाए तो सनम सादगी रखना।।
आज काँसे में जो भी है उसे तू खैरात ना समझ,,
हाथों को रख कर गिरवी बरहम ना कभी करना।।
कोई कैसा भी हो सूरत से इससे फ़र्क़ क्या है देव,,
अगर अच्छा लगे कोई तो अगम दिल्लगी करना।।
-सुनील देव