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ले जाएगा।

सुनील देव

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कौन पुरानी यादों को इन आख़िर तक ले जाएगा।
        
                                                    
                            
एक हमारा दिल ही हैं जो रहबर तक ले जाएगा।।

दिल में बसने वाले अक्सर दिल को ही तड़पाते है,
वरना तो ये सारा जहाँ बस बिस्तर तक ले जाएगा।

राहत भी मिल जाएगी थोड़ा सब्र करो यारों तुम,,
अभी तखल्लुस छोटा है पर अंबर तक ले जाएगा।

चलते चलते थकने लगो तो खुद को गले लगा लेना
कोई नहीं है यहाँ किसी का जो घर तक ले जाएगा।

सांसों की माला को जपना मुश्किल है आसान नहीं
जपते जपते फिर भी दिल ये साबिर तक ले जाएगा।

उन्हें क्या मालूम है जिनका दर्द से लेना एक नहीं,,
उनको तो खुद रस्ता ही मुसाफ़िर तक ले जाएगा।।

पहरों पहर जिसे जगने की आदत है रातों को देव,,
उन आंखों इक दिन पल इक नश्तर तक ले जाएगा
-सुनील देव
2 महीने पहले
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