विज्ञापन

क्या हो गया तुझे।

सुनील देव

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पहले सी नहीं है सूरतें क्या हो गया तुझे।।
        
                                                    
                            
करती नहीं है अब बातें क्या हो गया तुझे।।

पहले तो ऐसे हाल में कभी देखा नहीं तुझे,,
टूटी हुई है सब हिम्मतें क्या हो गया तुझे।।

पहले तो किसी बात का बुरा मानती ना थी,,
चेहरे पे है नई सिलवटें क्या हो गया तुझे।।

यूँ आसमान को आज क्या तू देख रहा है,,
पँछी भी सारे पर कटे क्या हो गया तुझे।।

एहसान ज़िंदगी का तो पहले से सर पे है,,
लेता नहीं क्यूँ करवटें क्या हो गया तुझे।।

चलो दूर से ही सही पर कुछ मुस्कराओ तो,,
अच्छे नहीं ये सर झुके क्या हो गया तुझे।।

तेरी वज़ह से चाँद और सूरज का वज़ूद है,,
अब देव क्यूँ ये बल पड़े क्या हो गया तुझे।।
-सुनील 
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile