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पत्थर हूँ पर पत्थर भी तो घिसता होगा।।

सुनील देव

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पत्थर हूँ पर पत्थर भी तो घिसता होगा।।
        
                                                    
                            
हंसने का हक़ अपना भी तो बनता होगा।।

तुझको क्या लगता है जंगल अपना है ये,,
जंगली हूँ डर मुझको भी तो लगता होगा।।

आख़िर कब तक आँखों को समझाऊं मैं,,
बहने का दिल इनका भी तो करता होगा।।

दरिया के उस पार जाओगे तो पता चलेगा,,
कितनी है तक़लीफ़ सफ़र जो करता होगा।।

हर बात पे तंज़-ओ-मिज़ाह ठीक है लेकिन,,
आंखों को अपनी वो भी तो मलता होगा।।

सबको हैं उम्मीद वफ़ा की मुझसे लेकिन,,
बात करे दिल अपना भी तो करता होगा।।

चलते चलते पाँव की एड़ी घिस गई है देव,,
रुकने का दिल उसका भी तो करता होगा।।
-सुनील देव
2 महीने पहले
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