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गर्मियों की धूप में

Sanajay Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अजीब शांत पल है,
        
                                                    
                            
कोई चिल्ल पों नहीं,,
परवाह करने का
कोई दिखावा नहीं,,
कुछ पाना नहीं,
कुछ खोना नहीं।।
कहीं आना नहीं,
कहीं जाना नहीं,,
व्यस्त होने का ,
कोई बहाना नहीं।।
धूप में गर्मियों के,
बिन खाए पिए,,
अब किसी के लिए,
खुद को थकाना नहीं।।
कोई बंधन नहीं,
कोई तड़पन नहीं,,
फ़िक्र जैसी कोई
मन में उलझन नहीं,,
कह रही हैं तरंगें हृदय
की मेरे,
हमको सोने दो कोई,
जगाना नहीं।।
एक घंटा पहले
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