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कर डालो

Sameer Meghta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहीं निराशा की धुंधली बदली
        
                                                    
                            
‎आनन्द सस्मित में खलल करे
‎तो उसे बरसा डालो।
‎कहीं जीवन के घने कानन में
‎कलरव करती चिड़िया दूर होने लगे
‎तो उसे खुद में बसा डालो।

‎क्रोध - अग्नि के भीषण ताप से
‎मन में ठहराव के पुल जलने लगे
‎तो उसे जमा डालो।
मन के सुन्दर बाग़ में
‎सुगन्धित कुमलाये पुष्प मिले 
‎तो उसे खुद में समा डालो।

‎कहीं आलस्य की घनी काई में
‎जीवन के पैर फिसल जाने लगे
‎तो उसे हटा डालो।
‎कही संशय की धुंध में
‎खुद से मिलना मुश्किल लगे
‎तो उसे खुद से मिटा डालो।
4 घंटे पहले
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