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ज़ख्म दिल पर कई खाए बैठे हैं हम

Samay Shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़िंदगी तो हमारी ना आसान है,
        
                                                    
                            
ज़ख्म दिल पर कई खाए बैठे हैं हम।
बात होठों पे आई, दबी ही रही,
ग़म ज़माने से छुपाए बैठे हैं हम।
दिल लगा ही लिया है तो कुछ तो कहो,
लब पे ख़ामोशी सजाए बैठे हैं हम।

ज़िंदगी तो हमारी ना आसान है,
ज़ख्म दिल पर कई खाए बैठे हैं हम।
ज़िंदगी तो हमारी ना आसान है,
ज़ख्म दिल पर कई खाए बैठे हैं हम।
आशा के दिए अब भी जले हैं,
टूटे हुए दिल को बचाए बैठे हैं हम।

रुख़ हवाओं सा तेरा बदल जाएगा,
आस फिर भी लगाए बैठे हैं हम।
जो मुक़द्दर में अपनी लिखा ही न था,
उसकी चाहत में खुद को मिटाए बैठे हैं हम।
तुम तो राहों में तन्हा ही छोड़ोगी कल,
दीप उम्मीदो के जलाए बैठे हैं हम।

ज़िंदगी तो हमारी ना आसान है,
ज़ख्म दिल पर कई खाए बैठे हैं हम।
ज़िंदगी तो हमारी ना आसान है,
ज़ख्म दिल पर कई खाए बैठे हैं हम।
आशा के दिए अब भी जले हैं,
टूटे हुए दिल को बचाए बैठे हैं हम।


दर्द की रात ढलने का नाम ही न ले,
ख़्वाब फिर भी जगमगाए बैठे हैं हम।
ज़िंदगी का सफ़र ख़त्म होने को है,
तेरी चौखट पे पलकें बिछाए बैठे हैं हम।


ज़िंदगी तो हमारी ना आसान है,
ज़ख्म दिल पर कई खाए बैठे हैं हम।
ज़िंदगी तो हमारी ना आसान है,
ज़ख्म दिल पर कई खाए बैठे हैं हम।
आशा के दिए अब भी जले हैं,
टूटे हुए दिल को बचाए बैठे हैं हम।

जिंदगी तो हमारी ना आसान है,
ज़ख्म दिल पर कई खाए बैठे हैं हम।

तुम तो राहों में तन्हा ही छोड़ोगी कल,
दीप उम्मीदो के जलाए बैठे हैं हम।
दर्द की रात ढलने का नाम ही न ले,
ख़्वाब फिर भी जगाए बैठे हैं हम।
ज़िंदगी का सफ़र ख़त्म होने को है,
तेरी चौखट पे पलकें बिछाए बैठे हैं हम।

जिंदगी तो हमारी ना आसान है,
ज़ख्म दिल पर कई खाए बैठे हैं हम।
2 महीने पहले
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