विज्ञापन

क्योंकि वो डॉक्टर हैं ना...

Sakshi Jaiswal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब मैं पूछती हूँ उनसे—
        
                                                    
                            
बताओ ना, मैं क्या हूँ आपके लिए?
वो मुस्कुराकर मेरी नब्ज़ छूते हैं और कहते हैं—
"जैसे साँसों के चलने को ऑक्सीजन ज़रूरी है,
वैसे ही मेरे होने के लिए... आपका होना ज़रूरी है।"
हाँ, वो प्यार भी डॉक्टरी अंदाज़ में ही जताते हैं...
क्योंकि वो डॉक्टर हैं ना!

जब मैं रूठकर पूछती हूँ उनसे—
बताइए ना, कितना प्यार करते हैं आप मुझसे
वो मुस्कुराते हैं और धीरे से कहते हैं—
जितना प्यार इस दिल को अपनी धड़कनों से होता है,
जो हर पल, हर मिनट, हर सेकंड... बिन रुके धड़कती हैं।
हाँ, उनकी हर एक बात में दिल का ही किस्सा आता है...
क्योंकि वो डॉक्टर हैं ना!

जब मैं डरकर पूछती हूँ उनसे—
अगर मैं कभी दूर चली गई, तो क्या हाल होगा आपका?
वो गंभीर होकर मेरे माथे को चूमते हैं और कहते हैं—
जैसे ईसीजी की चलती हुई लकीर सीधी हो जाएगी,
यह धड़कती हुई ज़िंदगी... उसी पल रुक जाएगी।
हाँ, वो मेरी धड़कनों को मुझसे भी बेहतर समझ पाते हैं...
क्योंकि वो डॉक्टर हैं ना!
हाँ, वो इश्क़ भी दवाइयों और धड़कनों से बयाँ कर जाते हैं...
क्योंकि वो डॉक्टर हैं ना!
5 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Deepti Tripathi

119 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

787 कविताएं

View Profile