नयन तेरे खोल दे पोल तेरे दुख का,
यह द्वार हैं तेरे टूटे बिखरे दिल का, चीर सुख हो या हो गम सब नयन पे झलकता,
नयन दर्पण हैं तेरे भिन्न व्यक्तित्व का।
पंचेन्द्री में हैं यह प्रमुख,
तेरा दुख इससे नहीं छुपा,
सारी दुनिया को झूठ तुम कह सकते,
पर इन नयनो को न दे सकते धोखा।
इसके बिना छा जाएँ चारो ओर कालिमा,
नयन के बिना लगता दुनिया में कुछ न रखा,
यह दो नयन स्त्री की हैं सुंदरता,
जो दृष्टीहीन पूछ उनको इन नयन का मूल्य क्या?
व्यथा से भारी हृदय हुआ जब,
यह नयन से अविरत बही अश्रृ धार,
अन्य को देख हृदय खुश हुआ जब,
झलका इन नयन में हृदय में छुपा प्यार।
नयन मुख्य अंग हैं मानव शरीर का,
यह अंतिम माध्यम हैं भावो के अभिव्यक्ति का!
यह नयनो के बिना मनुष्य हैं अधूरा,
नयन प्रमाण हैं मनुष्य के पास अब भी दिल होने का।।
~ सौम्य साई धनुष