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एक अनमोल साथ

SACHIN PANDEY

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आई ऐसी सुबह एक दिन, जिस दिन तेरा साथ मिला |
        
                                                    
                            
जीवन की मुरझाई बगिया में, जैसे सुन्दर फूल खिला |
आँख मूंदकर चलते-चलते, जैसे उपवन का ताज़ मिला,
ऐसी उषा की किरणों में, मुझको तेरा साथ मिला |

हाथ थामकर तेरा मुझको, जैसे कोई ख़्वाब मिला |
बरसों की प्यासी धरती को, सावन का उपहार मिला |
जो खोया था कहीं भीड़ में, मुझको वो वजूद मिला |
मैं तेरा हूँ और तू मेरी, ऐसा एक अहसास मिला |

तूने जैसे छुआ मुझे, तो महक उठी मन की बगिया |
बहने लगी प्रेम की धारा, जैसे कोई पावन नदिया |
अंधकार जो था जीवन में, तुमने उसे समेट लिया |
सूनी-सूनी साँसों को तुमने, जीवन का उपहार दिया |

मंजिल की अब चाह नही है, जबसे तेरा साथ मिला |
अँधेरी राहों में भी अब, जीवन का अहसास मिला |
अब न कोई चाह अधूरी, अब न कोई अभिलाषा है,
मौन खड़ा हूँ सम्मुख तेरे, यही प्रेम की भाषा है।

धूप मिले या छाँव मिले अब, हर मौसम स्वीकार मुझे,
तेरे संग काँटे भी चुन लूँ, ऐसा हुआ है प्यार मुझे।
युग-युग तक जो साथ निभाए, ऐसा अटूट वो साथ मिले,
हाथों में लेकर हाथ तेरा, जनम-जनम का वास मिले |

मैं हरदम तेरा रहूँ, और हरदम तेरा साथ मिले |
मैं तेरा सर्वस्व बनूँ, और हरदम तेरा प्यार मिले |
रुक जाये दिल की धड़कन, फिर भी तेरा साथ रहे |
हर जन्म में तेरा-मेरा, यूँ ही हरदम साथ रहे |
2 महीने पहले
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