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किताबें और अकेला सफ़र

SACHIN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अल्फ़ाज़ बनकर जो पन्नों पर ठहर जाती हैं,
        
                                                    
                            
किताबें ही तो इंसान को खुद से मिलाती हैं।
जब राहों में सन्नाटा हो और कोई साथ न दे,
ये खामोश सफ़र में चलना सिखाती हैं।
किसी का इंतज़ार मत कर ऐ राही,
तू अकेले चलने का दम तो रख।
किताबों के ज्ञान को अपनी ढाल बना,
और हर मुश्किल में मुस्कुराने की आदत रख।
बस एक पहला कदम बढ़ाना ही काफी है,
मंजिलें खुद-ब-खुद तेरे करीब आएंगी।
आज जो तन्हाई में तू इतिहास पढ़ रहा है,
कल दुनिया तेरे ही पीछे-पीछे आएगी।
2 महीने पहले
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