हम थे नादान जो दुनिया पे एतबार किये।
एक मासूम सा चेहरा, कई किरदार जिये।
सामने था कोई इंसान, जो हैवान भी था,
सबकी खातिर था वो भगवान का अवतार लिये।
उसके हाथों से जहर सबने पिया, हँसके पिया,
पी के कहते हैं सुधा हम सरेबाजार पिये।
मिली है जिन्दगी आखिर तो मौत आनी है,
तेरे खाते में नकद क्या है, क्या उधार किये।
फिर न कहना कि हमें होशियार क्यों न किया,
हर एक गुनाह पे आगाह बार बार किये।