विज्ञापन

ये कैसा युग

S. Mukesh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये कैसा युग ?
        
                                                    
                            

कृष्ण की बांसुरी मौन है ,
सुन पृथ्वी पर नारी का क्रंदन !
शिव का कंठ भी सूख गया
जब हलाहल अबोध को लील गया !
धनुष त्याग राम व्यथित हुए
मारा था रावण फिर ये बाकी कौन रहे !
दुर्गा का त्रिशूल शर्मसार है
लौट आए जिनका था संहार किया !
विष्णुचक्र सुदर्शन अचंभित है,
उसकी गति ,धार सब खंडित है !
आजकल कहा जा रहा है कि फेसबुक पर लिखकर क्या फायदा..
लेकिन मुझे लगता है कि इन पोस्टस को अगर मेरा अपना
बेटा ही पढ़ेगा तो शायद कहीं न कहीं थोड़ी बहुत
संवेदनशीलता उसके भीतर पैदा कर पाऊंगी !
-सुजाता गुप्ता


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

श्री सनातन

671 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13377 कविताएं

View Profile

Neet Biology

43 कविताएं

View Profile