ये कैसा युग ?
कृष्ण की बांसुरी मौन है ,
सुन पृथ्वी पर नारी का क्रंदन !
शिव का कंठ भी सूख गया
जब हलाहल अबोध को लील गया !
धनुष त्याग राम व्यथित हुए
मारा था रावण फिर ये बाकी कौन रहे !
दुर्गा का त्रिशूल शर्मसार है
लौट आए जिनका था संहार किया !
विष्णुचक्र सुदर्शन अचंभित है,
उसकी गति ,धार सब खंडित है !
आजकल कहा जा रहा है कि फेसबुक पर लिखकर क्या फायदा..
लेकिन मुझे लगता है कि इन पोस्टस को अगर मेरा अपना
बेटा ही पढ़ेगा तो शायद कहीं न कहीं थोड़ी बहुत
संवेदनशीलता उसके भीतर पैदा कर पाऊंगी !
-सुजाता गुप्ता
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