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वो लड़की !

S. Mukesh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वह लड़की
        
                                                    
                            

सबसे जिंदादिल लड़की
हंसती है अपनी ही नादानियों पर !
सबसे खुशहाल लड़की
खिलखिलाती है जीवन की दुश्वारियों पर !
सबसे खूबसूरत लड़की
मुस्कुराकर नज़रअंदाज़ करती है उम्र की निशानियों को !
सबसे निडर लड़की
पंजा लड़ाती है दुनिया के लांछनों से!
सबसे रंगीली लड़की
उड़ती है बनकर मनमौजी तितली !
सबसे सुरीली लड़की
चहकती है सदा अपनी ही धुन पर !
सबसे फुर्तीली लड़की
फुदकती है गौरैया बन घर के आँगन में !
सबसे दिलदार लड़की
ठेस लगने पर दिल से देती है माफी !
सबसे ममतामयी लड़की
बेजुबानों की भी ज़ुबानें है जानती !
सबसे प्रेममयी लड़की
प्रेम करती बस स्वयं के स्वाभिमान से !
सबसे चरित्रवान लड़की
आँकती है स्वयं को केवल स्वयं के नजरिए से !
सुनो , तुम ही हो न
वह लड़की ?
-सुजाता गुप्ता


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले
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