विज्ञापन

प्रेम

S. Mukesh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सुना है प्रेम का फूल जीवन मे अचानक खिला करता है,
        
                                                    
                            
क्योंकि
इसके अंकुरित होने का कोई तय मौसम नहीं हुआ करता है!
सुना है प्रेम किसी से भी हो जाता है,
क्योंकि
किससे हो जाए यह भी एक पहेली ही हुआ करता है !
सुना है प्रेम उम्र के बंधन में भी नहीं बंधता,
क्योंकि
उम्र देह की होती है और यह रूह से हुआ करता है!
सुना है प्रेम में नाजायज़ कुछ भी नहीं,
क्योंकि
प्रेम को तो ईश्वर का आशीर्वाद मिला करता है!
सुना है प्रेम किसी खास दिन का मोहताज नहीं,
क्योंकि
इस बंधन में तो उम्र भर का जश्न हुआ करता है !
इसलिए जब भी प्रेम तुम्हारे दिल का द्वार खटखटाए,
तब तुम बिल्कुल देर न करना!
गल्ती से भी कोई तर्क न करना!
बिन सोचे बस दिल की करना!
लेकिन बस कहना कुछ न !
मौन रहकर प्रेम की भाषा सुनना!
फिर सदियों तक उसमें बहना!
धन्यवाद

-सुजाता

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

श्री सनातन

671 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13377 कविताएं

View Profile

Neet Biology

43 कविताएं

View Profile