सुना है ,
भूख का स्वाद चख कर कलम रोटी पर लिखती है
फटी जेब से झांकती कलम दौलत पर लिखती है
सात तालों में छटपटाती कलम आज़ादी पर लिखती है
दिनभर चप्पल घिसती हुई कलम रोजगार पर लिखती है
परदेस में बैठी उदास कलम देशप्रेम पर लिखती है
बेसहारा भटकती कलम परिवार पर लिखती है
मेरी कलम बस प्रेम पर लिखती है
-सुजाता गुप्ता
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