समयसीमा
ज़िंदगी में हर काम
एक तय समयसीमा
मे ही होती सही ।
अगर कोई मोबाइल को
पूरे दिन चार्ज करता है ,
वह बहुत गर्म हो सकता है
बेकार हो सकता है
या फट भी सकता है।
अगर नल को बिना किसी
समय-सीमा के
छोड़ा जाय खुला ,
तो बहुत सारा पानी
बर्बाद हो जाएगा।
अगर परीक्षा की अवधि
अनिश्चित समय के लिए हो,
तो कोई पक्का नतीजा
निकल ही नही सकता।
अगर संसद का कोई
सदस्य बहुत ही लम्बी
अवधि तक बोलता रहे,
तब दूसरे सदस्यों को
मौका नहीं मिलेगा,
ऐसे में स्पीकर को
दखल देना ही पड़ेगा।
-सुबीर कुमार भट्टाचार्य