वह चांद क्यों निकाला था
जिसे डूब जाना था
इतनी मोहब्बत क्योंकि हमसे
अगर हमें भूल ही जाना था
चांद की चांदनी में चांद
गवारा ना हुआ
हम हजारों के हुए लेकिन
कोई हमारा ना हुआ