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किनारों का सफ़र क्या होगा,

Roshni Dubey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कश्ती ही जाने
        
                                                    
                            
किनारों का सफ़र क्या होगा,
मन ही समझे इन जज़्बातों
पर असर क्या होगा।
संयम से चीज़ें सँभल तो जाती हैं,
मगर...इस ढलते हुए वक्त का न
जाने हश्र क्या होगा...और
समय बीत जाने पर जो मिला भी तो क्या,
उस देर से मिली खुशी का
भला असर क्या होगा...

 
एक महीने पहले
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