हम पैसो दौलत शोहरत के लिए अपनो से झगड़ा करते है।
बस अपनी मक्कारी पे खुश होते थे की हम काम तो तगड़ा करते है।
आज पैसो की कोई बात नही, बस अपनो का ही साथ सही ,
तभी तो शहरी जीवन को छोड़ कर लोग गाँव की ओर मुड़ा करते है।
ये हालात देख ओर ऐ नादान इंसान समझ,
यहाँ कुछ भी तेरे बस में नही।
क्यों तेरा मेरा करता है, धन जोड़ जोड़ घर भरता है,
तेरे अपनो के सिवा कुछ भी तेरा सच में नही।
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