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मैं मर के जीना चाहता हूँ

Rohit Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            न हो धरा हासिल मुझे क्या ?
        
                                                    
                            
मैं आकाश पाना चाहता हूँ।
पुष्प-गुच्छों की चाहत नहीं है,
मैं दिलों में जीना चाहता हूँ।
अमरत्व पीकर कौन आया,
मौत ही शाश्वत रही है,
मुझे जीकर नहीं जीना है ज़्यादा,
मैं मर के जीना चाहता हूँ।
—रोहित तिवारी
एक महीने पहले
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