विज्ञापन

आमन्त्रण

Rohit Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लिख दूँगा मैं ज़ख्म सभी,
        
                                                    
                            
क्या तुम मरहम बन पाओगी?
मेरे जीवन के बिखरे स्वर हैं,
क्या तुम सरगम बन पाओगी?
जीवन की अनबन राहों में
सब खोकर बचा अकेला हूँ
मेरे जीवन में बस मायूसी है
मैं भरा दुःखों का मेला हूँ
मेरे जीवन में कड़क धूप
क्या तुम शबनम बन पाओगी?
मेरे जीवन के बिखरे स्वर है
क्या तुम सरगम बन पाओगी?
तुम फूलों की अभिलाषी हो
है बदन तुम्हारा फूलों सा
मैं उजड़ी बागों का माली
है बिस्तर मेरा शूलों का
राह मेरे जीवन की पथरीली
क्या तुम संग-संग चल पाओगी?
मेरे जीवन के बिखरे स्वर हैं
क्या तुम सरगम बन पाओगी?”
-रोहित तिवारी
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all