विज्ञापन

सत्य की जीत:-ढोल नगाड़ा बजने दो।

Rohit Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हुई सत्य की जीत यहां पर, ढोल नगाड़ा बजने दो।
        
                                                    
                            
घर-घर तीज त्यौहार मनाओ, घी के दीपक जलने दो।
टूट गया अन्याय का किला, मिटा कुहासा साजिश का,
ईमानदार के माथे पर अब, विजय तिलक तुम सजने दो।

घी के दीपक जलने दो,ढोल नगाड़ा बजने दो।
घी के दीपक जलने दो,ढोल नगाड़ा बजने दो।

जन-जन के चेहरे मुस्काए, न्याय की पावन बेला में,
कलियुग के इस विजय पटल पर, खुशियों का रस बहने दो।
झुक गया सर हर बैरी का, चमका सत्य का सूर्य आज,
हर आंगन में गूंजे मंगल, ढोल नगाड़ा बजने दो।

घी के दीपक जलने दो,ढोल नगाड़ा बजने दो।
घी के दीपक जलने दो,ढोल नगाड़ा बजने दो।

— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all