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रण बीच

Rohit Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रण बीच कड़कड़ वज्र गूँजा, शत्रु दल थर्रा गया,
        
                                                    
                            
सिंहद नाद प्रचंड सुन, अंबर विकल घबरा गया।
खड्ग वीर सुपुत्र की, जब शत्रु-शिर पर तान दी,
माँ भारती की आन पर, हँसकर तरुण ने जान दी।

शव देख सुत का मौन गोदी में उठा माता रोई,
उस मर्मभेदी चीख में, सुध-बुध जगत ने है खोई।
जो कल सजाता था कलाई, बहन सुबक कर ढह गई,
सूनी हुई सिंदूर-रेखा, वेदना बस रह गई।

अश्रुपूरित आँख में, प्रतिशोध की ज्वाला जली,
बलिदान की इस भूमि पर,शौर्य की कलिका खिली।
रोया भले परिवार पर, इतिहास गौरव गाएगा,
इस वीर का बलिदान जग में, अमर पद को पाएगा।
— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'
एक महीने पहले
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