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चुप बैठे जो सिंह सो रहे, उनको आज जगाना है

Rohit Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            डर को डर लग जाए हमसे, ऐसा रूप दिखाना है,
        
                                                    
                            
तूफ़ानों के रुख को मोड़ें, यह हुंकार सुनाना है।
अब थमना पाप, ठहरना मौत, आगे कदम बढ़ाना है,
इतिहास के कोरे पन्नों पर, अपना नाम सजाना है!

अंबर को झुकना ही होगा, यह शौर्य का नारा है,
ठोकर से जो पर्वत तोड़े, वह संकल्प हमारा है!
थिरक उठी हैं नसें लहू की, आँखें अब अंगारा है,
मिटा दे जो हर एक बाधा को, वह शौर्य हमारा है।

चुप बैठे जो सिंह सो रहे, उनको आज जगाना है,
हुंकारों से सोया हुआ, वो स्वाभिमान लौटाना है!
कायरता की केंचुल तजकर, आगे कदम बढ़ाना है,
अन्याय के आगे अब तो, रणचंडी को लाना है!
— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'
2 महीने पहले
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