बहुत आए सोगवार मेरे
ग़मगुसार फिर भी कम आए
एक तू आ जाए तो दम में दम आए
एक तो रात भर से मेरे आंसू नहीं रुक रहे
अब इस पर क्या झगड़ना के
किसके हिस्से कितने ग़म आए
-रोहित नागर रम्ज़