चलो यारों आज एक जाम हो जाए
जिंदगी के कुछ पल उनके नाम हो जाए
उनको पता भी न चले
हाल ए दिल तमाम हो जाए
वक्त बेवक़्त वो हमें याद करे
काश! ये छोटा सा एहसान हो जाए
चलो यारों आज एक जाम हो जाए...
कोई बताए कैसे भूले उनको
जो नींद में हर वक्त सताये हमको
हर पल सोचते है कैसे
उनके पास हमारा ये पैग़ाम जाए
पर डरते हैं सोच कर
न जाने क्या अंजाम आए
चलो यारों आज एक जाम हो जाए....
साखी तो हम बहुत पी चुके यारों
उनकी आँखो से बस एक ज़ाम हो जाए
वो नज़रों से पिलाए हमको
और "रोही" सुबह से शाम हो जाए...
चलो यारों आज एक जाम हो जाए...