जिस पल में जीनीं थीं सदियां
आया वो इक पल की खातिर
~ रोहित गुस्ताख़
-हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।