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आज की शाम थोड़ा जिए हैं-

RN TIWARI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब बेदर्द यादें सताएँ,
        
                                                    
                            
जब थोड़ा क़दम लड़खड़ाएँ,
तो समझो हम थोड़ा पिए हैं,
आज की शाम थोड़ा जिए हैं।
इन पैमानों में इश्क़ है क्या?
इन दीवानों में इश्क़ है क्या?
जब अश्कों बिना दिल रोए,
तो समझो हम थोड़ा पिए हैं,
आज की शाम थोड़ा जिए हैं।
हम तो उसके हवाले हुए हैं,
हमको साक़ी सँभाले हुए हैं।
हम मुस्कुराए और सब रोए,
तो समझो हम थोड़ा पिए हैं,
आज की शाम थोड़ा जिए हैं।
एक महीने पहले
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