तुझे ढूंढता है ये दिल मेरा,पास नही अहसास है तेरा।
प्यारी सी तेरे आँखो में,लगता है संसार है मेरा।
क्यो?चली गई छोड़ के ,ये सुखी संसार मेरा।
यादो के हर सफर में,पल-पल याद आता है तेरा।
तू साथी थी मेरे,क्यो?साथ निभाया नही मेरा।
चाहत इतना था कि,प्यार करते थे रूह को तेरा।
दिल याद करता है, ओ बीते हलम्हो को।
सिहरन सी हो जाती है, याद करके तुमको।
दिल की धड़कन में, छुपा के रखा था तुमको।
सांसो में बसा के, रखा पल-पल तुमको।
तुझको समझा था, चलती सफर में साथी हमने।
हमे छोड़ कर कहा चली गई,तुमने।
तू बेवफा नही है ,ओ साथी हमसफ़र।
तुझको ढूंढते हैं, गली-गली, नगर-नगर।
तू मेरी सच्ची मोहोब्बत, और साथी था मेरा।
पल-पल याद आती हो,सुबह हो या हो सबेरा।
लौट आओ मेरे जीवन मे,एक बहार बनके।
फिरसे सजा दो मेरे जीवन को,प्यार बनके।
मेरे चाहत को,अपना बनालो मेरे साथी।
मेरे सच्ची मोहोब्बत को, अपना लो साथी।
खुसबू और प्यार से भर दो, मेरे जीवन को।
फिर से महका दो, मेरे घर आंगन को।
मेरे दिल मे कोई नफरद नही,आ जाओ मेरे पास।
लौट आओ मेरे जीवन मे,यही है मेरे आस।
साथ रह कर,मेरे जीवन सँवर देना मेरे साथी।
पास रह कर, मेरे हृदय में रुक जाना मेरे साथी।
मेरे हर सफर में,सदा साथ निभाना साथी।
दुख और सुख में,मेरे साथ ही रहना मेरे साथी।
लौट आओ मेरे जीवन मे,दोबारा साथी।
ये जीवन चक्र है, मिलना और बिछड़ना होता ही है।
बिछड़ कर मिल जाना,सच्ची मोहोब्बत होता है।
आँखो से दूर हो ,पर दिल के करीब रहती हो।
दिल से रुह का,एक सच्ची मोहोब्बत हो।
आत्मा से आत्मा तक जुड़ा,सच्ची मोहोब्बत हो।
लौट कर आ जा साथी,तुम साथी हमफर हो।
मेरे आत्मा की तृप्ति,और मेरे दिल की सुकून हो।
मेरे अंतर मन मे रहने वाली,सच्ची मोहोब्बत हो।
लौट के आ जाओ साथी,तुम्ही मेरी सच्ची मोहोब्बत हो।
मेरे चाहत भरी ख्वाब का,हसीन मुकमल हो।
लौट के आ जाओ साथी,तुम्ही तो मेरे सच्ची मोहोब्बत हो।