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ओ पल खूबसूरत थी

Ritu Matawale

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ओ पल कितनी खूबसूरत थी,चलती थी मेरे राहो पर।
        
                                                    
                            
खुशियो की लहर उठती थी, मेरे जीवन के एक-एक कन पर।
साथ रहा ओ मेरे साथी,मेरे जीवन के हर छन-छन पर।
महकती थी मेरे जीवन मे,फूलो की कलिया बन-बन कर।
कितना सुहाना था ओ सफर,साथ चलती थी साथी बन कर।
हर कसमे वादे,जीवन मे निभाया साथी बन कर।
रहती थी हर पल,मेरे हृदय में प्रेम सुमन बन कर।
तेरे खुसबू में मेरा मन,रमा करता था ओ साथी मेरे।
तू जीवन का अंश था,रहती थी सांसो में मेरे।
अंतर मन के इस चितवन में,सदा विराजित रहती थी।
पल-पल मेरे हृदय में,तेरे ही प्यार रहती थी।
जीवन के हर मौसम में,साथ निभाया करती थी।
संघर्षो की हर घड़ी,साथ मेरे तू चलती थी।
इस जीवन की छोटी सी बगिया में,खुसबू बन तू रहती थी।
जीवन के हर छन-छन में,सदा ही साथ निभाया करती थी।
समय कठिन हो पर भी,साथ नही तू छोड़ी थी।
कटीले हर राहो में भी,साथ मेरे तू चलती थी।
मेरे जीवन मे रह कर तुम,फूलो की तरह महकती थी।
ठंडी पेड़ो के छाव बन कर,मेरे साथ तुम रहती थी।
जीवन के हर तपिस में,शीतलता बन तुम रहती थी।
मेरे जीवन के हर रग-रग में,सदा निवासित रहती थी।
भूले पगडंडी में भी,सच्ची राहे बन तू चलती थी।
जीवन के हर छन-छन में, सदा साथ निभाया करती थी।
फूलो की बगिया बन,मेरे जीवन मे महकती थी।
प्रेम और सत्कार से,मेरे मन को भरती रहती थी।
ना गम था जीवन मे,बस सुखी जीवन संसार था।
इस छोटे से बगिया का,फूलो भरा संसार था।
ना चिंता थी जीवन मे,जैसे उत्सव भरा तेव्हार था।
मेरे जीवन के छोटी सी,महकता हुवा संसार था।
ना द्वेष था मन मे,आनन्द और उल्लास था।
मेरे जीवन मे तुम्ही तो,प्रेम भरा संसार था।
अंतहीन प्रेम की,तू मेरे जीवन मे मिशाल थी।
प्रेम भरा हृदय तेरा,बहुत ही विशाल थी।
अंधियारे में भी,ज्योति और जीवन प्रकाश थी।
दिन के उजाले में,शितलता भरी सुबह की ताप थी।
सुबह की सुकून भरी,चलती ठंडी हवाओं की झौका थी।
सावन की रिम-झीम, मस्ती भरी फुहार थी।
बसन्त की हरियाली,और महकती फूलो की सौगात थी।
झरने की बहती पानी सी,सौम्य और शीतल आवाज थी।
नदियो की बहती जलधारा सी,शितलता की मिशाल थी।
ओ साथी मेरे, सागर सी अनन्त तेरे प्यार थी।
तुझे प्रकृति का अनुपम दृश्य,कहने में कोई अतिशयोक्ति नही होता।
तेरी घनेरी बाल को,काली बादल कहने में अतिशयोक्ति नही होता।
तेरे प्यार को बरसती मेघा,कहने में अतिशयोक्ति नही होता।
सही राह दिखने वाली ,भगवान कहने में अतिशयोक्ति नही होता।
तू तो प्रकृति की सुंदर,मनोहर दृश्य है साथी मेरे लिए।
तू तो वृक्ष लताओं से सजी,जीवन है साथी मेरे लिए।
तू बहती बरसाती नदिया है, साथी मेरे लिए।
तू धूप में एक शीतल छाव है, साथी मेरे लिए।
तू संघर्षो में भी खड़ी,जीवन साथी है साथी मेरे लिए।
तू फूल है खुसबू है, बहार है जीवन साथी मेरे लिए।
तू जीवन की हर सुकून है, साथी मेरे लिए।
तू जीवन है सांस है, मेरे रक्त के हर कन में तेरा निवास है।
तू प्यार है इजयत है, आदर है सम्मान है।
तू आनन्द है उल्लास है, तू खुसबू से भरी गुलाब है।
तू प्रेम है पलास है, चम्पा और चमेली है।
तू मेरा जीवन है साथी,तू महकती चन्दन है।
दीप हो दिवाली हो,उत्सव का हर तेव्हार है।
आनन्द हो खुसी हो,मेरे दिल की प्रेम भरी आवाज है।
ओ साथी जीवन साथी,सदा ही मेरे पास है।
दूर रह कर भी मेरे जीवन मे,तेरा ही अहसास है।
ओ साथी जीवन साथी,तू सदा ही मेरे पास है।
यादो में स्मृति में,पल-पल तू हृदय में निवास है।
ओ साथी जीवन साथी,तू सदा ही मेरे पास है।
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