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मेरा पहला प्यार

ritesh ranjan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरा पहला प्यार
        
                                                    
                            

तेरी जिस्म से ज्यादा तेरी रुह को चाहता हूं
मै इश्क नहीं पर बेवफ़ाई से डरता हूं

हर कोई ढूंढ़ लेता है अपनों को अपनी दुनिया में
मै तो तुम्हे अब अपने सपनों में ढूंढ़ता हूं

तुम कोई चांद नहीं जो बादलों में छिप जाओगी
तभी तो हर रोज तेरी गलियों से गुजरता हूं

कहीं दिख जाए तेरी पांव के निशान इन गलियों में
जिसे तुम्हारी तस्वीर समझ कर छूना चाहता हूं

पहले मुझे आदत थी बेपरवाह समंदर में तैरने की
अब तो झील के पास भी जाने से डरता हूं

कहीं डूब न जाए ये ज़िन्दगी कंकड़ों की तरह उनमें
जिनके खातिर हर रोज किनारों पे आके बैठता हूं

मुझे प्यार हर दिन किसी अजनबी से हो जाता है
पर इज़हार तुम्हीं से मिलकर करता हूं

मै कभी जुदाई से नहीं डरता इश्क के सफर में
मै तो लड़कियों की सिर्फ बेवफ़ाई से डरता हूं

बहुत दर्द होता है तू जो वादा कर के नहीं आती मिलने
तेरे इंतज़ार में सारा दिन प्यासा ही रह जाता हूं

अब तो आदत सी हो गई है तुमसे बिछड़कर जीने की
तभी तो आंसुओं को शराब समझकर पी लेता हूं

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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