कैलाश पर मां, उनका घर है,
चांद सिर पे, गंगाधर हैं,
ठहरे इंतज़ार में, सदियां बीती,
शक्ति के शिव, सर्वेश्वर हैं,
हम शरण में देव सारे,
करने नियति के कुछ इशारे,
उस मिलन के गुण को गाने,
इस धरा को पुनः जो संवारे।
– ऋषभ भट्ट