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सबरी के झूठे बेरों को

Rishabh Bhatt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गेंद फेंककर देखा मैंने, गड्ढे में जब भी डाला है,
        
                                                    
                            
गिरने से पहले पैरों के, तूने मुझे निकला है,
दो चहेरे के दुनिया वालों में, तेरी एक नजर है पाई रे,
सबरी के झूठे बेरों को खा, मुस्कान भरें रघुराई रे।
3 महीने पहले
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