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पथ मेरा कौन?

Rishabh Bhatt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पग ढूंढ रहें हो विकल मौन,
        
                                                    
                            
हैं राह कई पथ मेरा कौन?

वो तितली, पुष्प सुगंधों वाली,
मादकता की जहां इठलाती लाली,
जहां सौन्दर्य पुरुष का शौर्य बताए,
मनोभूमि तप की सम्मोहन पाए,

या जग कोई ऐसा प्रात नवीन,
ओस–ओस में पुरुषार्थ लीन,
मन अश्व लिए तप की अभिलाषा,
सदाचार से लालायित भाषा,

मैं विकल्प चुनूं कर संकल्प मौन,
हैं राह कई पथ मेरा कौन?

पग ढूंढ रहें हो विकल मौन,
हैं राह कई पथ मेरा कौन?

एक ओर धरे व्याल भुजंग,
एक ओर चलें देव संग,
एक ओर है एकल राग,
एक ओर झरे स्वप्न पराग,

यह रात्रि विषम भोगों की,
विष–पीयूष के मिलन संयोगों की,
अज्ञानी जीवन को दो अर्थ मात्र,
मैं बनूं ज्ञान के ईश पात्र,

उर सामर्थ्य कमाए सिद्धि मौन,
हैं राह कई पथ मेरा कौन?

पग ढूंढ रहें हो विकल मौन,
हैं राह कई पथ मेरा कौन?
– ऋषभ भट्ट
9 महीने पहले
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