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मेरे पास आना छोड़ दो

Rishabh Bhatt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम जो गई आवाजें आना बंद हो जाएंगी,
        
                                                    
                            
एक कमरे में जवानी बंदी हो जाएगी,
तुम जहां भी रहोगी एक किस्सा साथ चलेगा,
मगर मेरी तो कहानी बंद हो जाएगी,

पर दिक्कत हो तो साथ निभाना छोड़ दो,
हां, यूं जबरन मेरे पास आना छोड़ दो।

कर तेरा आगाज़ सारी रौशनी सो गई,
पल भर ही सही पर बात तुमसे हो गई,
रिश्ते में अभी मोड़ अच्छा है, तुम बदल–
दोगी, तो समझूंगा मेरी राह खो गई,

एहसान इश्क़ का पगली जताना छोड़ दो,
हां, यूं जबरन मेरे पास आना छोड़ दो।

धड़कनें थम गईं, न मालूम हाल क्या है?
भूल बैठा हूँ मैं बता दो साल क्या है?
तुम्हारी बंदिशें ही मुझसे, दर्द हैं मेरी,
बेड़ियां खोल सारी बता दो ख्याल क्या है?

तुम बातें मन की, दिल में दबाना छोड़ दो,
हां, यूं जबरन मेरे पास आना छोड़ दो।

अनजान बाहों में मेरी अब गुजर नहीं,
रात आज है कि कल सहर नहीं,
तुम्हारे बाहों की, नींद मेरी कर्जदार है,
इसकी भी, तुम्हारे कमरे में अब मेरी कदर नहीं,

बस दूर जाने का अब से बहाना छोड़ दो,
हां, यूं जबरन मेरे पास आना छोड़ दो।

– ऋषभ भट्ट
2 महीने पहले
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