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मुबारकें हजार की, ख़ुशदिलों की, दिल–निशार की

Rishabh Bhatt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये शमा बाहर की, खुशी की,
        
                                                    
                            
सौ खुमार की,
इक मिली है लाडली,
है वक्त इश्तहार की,

धड़कनों में शोर है, इक वही,
वही तो चारों ओर है,
रहनुमा है चांद की! या
रहमतों की बाग–डोर है,

वो हवाओं में झूमती,
उर्मियाँ लहर बनी सी घूमती,
उलझनों के दायरे से,
चल अहद को चूमती,

आ चमन की सारी रौनकें,
गुलबहार खिल गईं,
तितलियों को, भटकी
एक बाग मिल गई,

आ गई हैं राधिके,
बन शक्तियाँ स्वयं चली,
बात भरके लोरियों में,
गा दूं मैं गली–गली,

है खुशी की बात–वात,
रात सारी नाच लो सभी,
मिश्रियां लबों की,
आके पास बांट लो अभी,

मुबारकें हजार की, ख़ुशदिलों की,
दिल–निशार की,
इक मिली है लाडली,
है वक्त इश्तहार की।
– ऋषभ भट्ट
2 महीने पहले
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