विज्ञापन

हर दुआ के बाद

Rishabh Bhatt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख़्वाबों के हीर को चल तराशते हैं साथ–साथ,
        
                                                    
                            
खिल सके जो बाग में, फूल वो तलाशते हैं साथ–साथ,
हमें हर शौक ने दिए हैं,
ये दिन बस आज के लिए है,
भूल न सकूं तुम्हें, वो एक याद चाहिए,
तूं मुझे मेरी हर दुआ के बाद चाहिए।

रौशनी से कर निकाह आ गई, चांदनी इसकदर,
सियाह में खिली, शम्मा ही डूबकर,
किरदार बिलकुन नए हैं,
हसरतों को हमारी गए हैं,
एक छोर पर मैं–तुम, दूसरे पे चांद चाहिए,
तूं मुझे मेरी हर दुआ के बाद चाहिए।

पूछना है क्या? तुम देख लो आवारगी यही है,
मदहोशी जो कहे हर गुफ्तगू सही है,
जां तुमने चलाए हैं,
नाजुक बालाएं हैं,
नादानियां जायज़ अभी बर्बाद चाहिए,
तूं मुझे मेरी हर दुआ के बाद चाहिए।
– ऋषभ भट्ट
8 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Adv DK Kanojiya

71 कविताएं

View Profile