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हर दुआ के बाद

                
                                                         
                            ख़्वाबों के हीर को चल तराशते हैं साथ–साथ,
                                                                 
                            
खिल सके जो बाग में, फूल वो तलाशते हैं साथ–साथ,
हमें हर शौक ने दिए हैं,
ये दिन बस आज के लिए है,
भूल न सकूं तुम्हें, वो एक याद चाहिए,
तूं मुझे मेरी हर दुआ के बाद चाहिए।

रौशनी से कर निकाह आ गई, चांदनी इसकदर,
सियाह में खिली, शम्मा ही डूबकर,
किरदार बिलकुन नए हैं,
हसरतों को हमारी गए हैं,
एक छोर पर मैं–तुम, दूसरे पे चांद चाहिए,
तूं मुझे मेरी हर दुआ के बाद चाहिए।

पूछना है क्या? तुम देख लो आवारगी यही है,
मदहोशी जो कहे हर गुफ्तगू सही है,
जां तुमने चलाए हैं,
नाजुक बालाएं हैं,
नादानियां जायज़ अभी बर्बाद चाहिए,
तूं मुझे मेरी हर दुआ के बाद चाहिए।
– ऋषभ भट्ट
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8 महीने पहले

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